श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 126: व्यास-मैत्रेय-संवाद—विद्वान् एवं सदाचारी ब्राह्मणको अन्नदानकी प्रशंसा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.126.6 
अपि नो दर्शनादेव भवतोऽभ्युदयो भवेत्।
मन्ये भवत्प्रसादोऽयं तद्धि कर्म स्वभावत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आपके दर्शन मात्र से ही हमें महान सफलता प्राप्त हो सकती है। आपने हमें जो दर्शन दिया है, वह महान आशीर्वाद है। ऐसा मेरा विश्वास है। यह कार्य भी आपके आशीर्वाद से ही स्वाभाविक रूप से संपन्न हुआ है। ॥6॥
 
Only by seeing you can we achieve great success. The vision you gave us is a great blessing. I believe so. This work has also been accomplished naturally by your blessing. ॥ 6॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas