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mahabharat 13.126.5: आप शुद्धचित्त हैं, इसलिए आपके सान्निध्य से मुझे यह महान लाभ प्राप्त हुआ है। मैंने तपस्वी ऋषि की बुद्धि से इस तथ्य का बार-बार चिंतन करके इसे स्पष्ट रूप से देखा है।   |   mahabharat अध्याय 13.126: व्यास-मैत्रेय-संवाद—विद्वान् एवं सदाचारी ब्राह्मणको अन्नदानकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.126.5 
भवतो भावितात्मत्वाल्लाभोऽयं सुमहान् मम।
भूयो बुद्‍ध्यानुपश्यामि सुसमृद्धतपा इव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आप शुद्धचित्त हैं, इसलिए आपके सान्निध्य से मुझे यह महान लाभ प्राप्त हुआ है। मैंने तपस्वी ऋषि की बुद्धि से इस तथ्य का बार-बार चिंतन करके इसे स्पष्ट रूप से देखा है।
 
You are of pure mind, therefore I have received this great benefit from your company. I have seen this clearly by contemplating this fact again and again with the intellect of a sage who has performed penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)