श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 126: व्यास-मैत्रेय-संवाद—विद्वान् एवं सदाचारी ब्राह्मणको अन्नदानकी प्रशंसा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.126.1 
भीष्म उवाच
एवमुक्त: प्रत्युवाच मैत्रेय: कर्मपूजक:।
अत्यन्तश्रीमति कुले जात: प्राज्ञो बहुश्रुत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! व्यासजी के ऐसा कहने पर कर्म के उपासक तथा अत्यन्त धनवान कुल में उत्पन्न विद्वान् मैत्रेयजी ने उन्हें इस प्रकार उत्तर दिया।
 
Bhishma says - King! When Vyasji said this, Maitreya, a worshipper of karma and a learned person born in a very wealthy family, replied to him in this manner.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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