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mahabharat 13.125.6-7: उन्हें हँसते देखकर मैत्रेयजी ने व्यासजी से पूछा - 'धर्मात्मान! विद्वान्! मैं आपको प्रणाम करता हूँ और आपसे पूछता हूँ कि अभी आपके हँसने का क्या कारण है? आप कैसे हँसे? आप तो तपस्वी और धैर्यवान हैं। आप अचानक कैसे प्रसन्न हो गए? यह मुझे बताइए।॥6-7॥   |   mahabharat अध्याय 13.125: व्यास और मैत्रेयका संवाद—दानकी प्रशंसा और कर्मका रहस्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 125: व्यास और मैत्रेयका संवाद—दानकी प्रशंसा और कर्मका रहस्य  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  13.125.6-7 
तमुत्स्मयन्तं सम्प्रेक्ष्य मैत्रेय: कृष्णमब्रवीत्।
कारणं ब्रूहि धर्मात्मन् व्यस्मयिष्ठा: कुतश्च ते॥ ६॥
तपस्विनो धृतिमत: प्रमोद: समुपागत:।
एतत् पृच्छामि ते विद्वन्नभिवाद्य प्रणम्य च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उन्हें हँसते देखकर मैत्रेयजी ने व्यासजी से पूछा - 'धर्मात्मान! विद्वान्! मैं आपको प्रणाम करता हूँ और आपसे पूछता हूँ कि अभी आपके हँसने का क्या कारण है? आप कैसे हँसे? आप तो तपस्वी और धैर्यवान हैं। आप अचानक कैसे प्रसन्न हो गए? यह मुझे बताइए।॥6-7॥
 
Seeing him smiling, Maitreya asked Vyasa - 'Dharmatman! Scholar! I salute and bow to you and ask you what is the reason for your smile just now? How did you laugh? You are an ascetic and patient. How did you suddenly become cheerful? Tell me this.॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)