Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.125.27: महर्षे! आप सुखपूर्वक अपने धर्म का पालन करते रहें, निरन्तर उन्नति करते रहें, प्रसन्न रहें, दान दें और यज्ञ करें। विद्वान और तपस्वी आपको पराजित नहीं कर सकेंगे। 27॥ | mahabharat अध्याय 13.125: व्यास और मैत्रेयका संवाद—दानकी प्रशंसा और कर्मका रहस्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रमस्वैधस्व मोदस्व देहि चैव यजस्व च।
न त्वामभिभविष्यन्ति वैद्या न च तपस्विन:॥ २७॥
अनुवाद
महर्षे! आप सुखपूर्वक अपने धर्म का पालन करते रहें, निरन्तर उन्नति करते रहें, प्रसन्न रहें, दान दें और यज्ञ करें। विद्वान और तपस्वी आपको पराजित नहीं कर सकेंगे। 27॥
Maharshe! May you remain happily engaged in following your religion, may you continue to progress, may you remain happy, give charity and perform yagya. Scholars and ascetics will not be able to defeat you. 27॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि मैत्रेयभिक्षायां विंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें मैत्रेयकी भिक्षाविषयक एक सौ बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥