Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.125.24: ब्रह्मभक्त पुरुष कर्तापन के अभिमान से रहित होता है। इसलिए उसके कर्म न तो पुण्य माने जाते हैं और न ही पाप। उसे अपने कर्मों के फलस्वरूप पुण्य और पाप नहीं मिलते।॥24॥ | mahabharat अध्याय 13.125: व्यास और मैत्रेयका संवाद—दानकी प्रशंसा और कर्मका रहस्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न वृत्तं मन्यते तस्य मन्यते न च पातकम्।
तथा स्वकर्मनिर्वृत्तं न पुण्यं न च पापकम्॥ २४॥
अनुवाद
ब्रह्मभक्त पुरुष कर्तापन के अभिमान से रहित होता है। इसलिए उसके कर्म न तो पुण्य माने जाते हैं और न ही पाप। उसे अपने कर्मों के फलस्वरूप पुण्य और पाप नहीं मिलते।॥24॥
A person devoted to Brahma is devoid of the pride of being the doer. Hence, his deeds are neither considered virtuous nor sinful. He does not receive the virtues and sins resulting from his deeds.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥