Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.125.14: इस दान से पवित्र हुई तुम्हारी तपस्या से मैं बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हारा बल पुण्य का बल है और तुम्हारी दृष्टि भी पुण्य की दृष्टि है॥14॥ | mahabharat अध्याय 13.125: व्यास और मैत्रेयका संवाद—दानकी प्रशंसा और कर्मका रहस्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो दानपवित्रेण प्रीतोऽस्मि तपसैव च।
पुण्यस्यैव हि ते सत्त्वं पुण्यस्यैव च दर्शनम्॥ १४॥
अनुवाद
इस दान से पवित्र हुई तुम्हारी तपस्या से मैं बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हारा बल पुण्य का बल है और तुम्हारी दृष्टि भी पुण्य की दृष्टि है॥14॥
I am very pleased with your austerity purified by this donation. Your strength is the strength of virtue and your sight is also the sight of virtue.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥