श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 124: कीड़ेका ब्राह्मणयोनिमें जन्म लेकर ब्रह्मलोकमें जाकर सनातनब्रह्मको प्राप्त करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.124.9 
व्यास उवाच
भो भो ब्रह्मर्षभ श्रीमन् मा व्यथिष्ठा: कथंचन।
शुभकृच्छुभयोनीषु पापकृत् पापयोनिषु॥ ९॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी बोले - ब्रह्मणशिरोमणे ! अब तुम्हें किसी प्रकार भी दुःख नहीं होना चाहिए । जो शुभ कर्म करता है, वह उत्तम योनियों में जन्म लेता है और जो पाप करता है, वह पाप योनियों में जन्म लेता है ॥9॥
 
Vyasji said – Brahmanshiromane! Now you should not be distressed in any way. The one who does good deeds is born in good births and the one who commits sins is born in sinful births. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)