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वाग्बुद्धिपाणिपादैश्च व्यपेतस्य विपश्चित:।
किं हास्यति मनुष्यस्य मन्दस्यापि हि जीवत:॥ ५॥
अनुवाद
चाहे मनुष्य मूर्ख हो या विद्वान्, यदि वह वाणी, बुद्धि और अंगों के बिना जीवित है तो कौन सी वस्तु उसे छोड़ेगी, वह स्वयं ही सभी प्रयत्नों से त्यागा हुआ है।
Whether a man is a fool or a learned man, if he is alive without speech, intellect and limbs then what thing will forsake him, he is himself forsaken by all efforts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥