Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.123.4: देवता, मनुष्य और तिर्यग्ज्ञानी प्राणी कर्मभूमि में किए हुए कर्मों का फल भोगते हैं। अज्ञानी मनुष्य का धर्म भी कामनाओं पर आधारित होता है और वे अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए ही सद्गुणों को अपनाते हैं।4॥ | mahabharat अध्याय 13.123: कीड़ेका क्रमश: क्षत्रिययोनिमें जन्म लेकर व्यासजीका दर्शन करना और व्यासजीका उसे ब्राह्मण होने तथा स्वर्गसुख और अक्षय सुखकी प्राप्ति होनेका वरदान देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्म भूमिकृतं देवा भुञ्जते तिर्यगाश्च ये।
धर्मोऽपि हि मनुष्येषु कामार्थश्च तथा गुणा:॥ ४॥
अनुवाद
देवता, मनुष्य और तिर्यग्ज्ञानी प्राणी कर्मभूमि में किए हुए कर्मों का फल भोगते हैं। अज्ञानी मनुष्य का धर्म भी कामनाओं पर आधारित होता है और वे अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए ही सद्गुणों को अपनाते हैं।4॥
Gods, humans and creatures lying in Tiryagyani suffer the consequences of the deeds done in the land of karma. The religion of an ignorant person is also based on desires and they adopt virtues only to fulfill their desires. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥