Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.123.22-23: राजकुमार! नाना प्रकार के सुखों का भोग करने के पश्चात् अन्त में तुम गौओं और ब्राह्मणों की रक्षा के लिए युद्धभूमि में अपने प्राण त्याग दोगे। तत्पश्चात् ब्राह्मण रूप में यथोचित दक्षिणा सहित यज्ञ करके स्वर्ग का सुख भोगोगे। तत्पश्चात् अविनाशी ब्रह्मा के रूप में होकर शाश्वत आनन्द का अनुभव करोगे। 22-23॥ | mahabharat अध्याय 13.123: कीड़ेका क्रमश: क्षत्रिययोनिमें जन्म लेकर व्यासजीका दर्शन करना और व्यासजीका उसे ब्राह्मण होने तथा स्वर्गसुख और अक्षय सुखकी प्राप्ति होनेका वरदान देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजकुमार! नाना प्रकार के सुखों का भोग करने के पश्चात् अन्त में तुम गौओं और ब्राह्मणों की रक्षा के लिए युद्धभूमि में अपने प्राण त्याग दोगे। तत्पश्चात् ब्राह्मण रूप में यथोचित दक्षिणा सहित यज्ञ करके स्वर्ग का सुख भोगोगे। तत्पश्चात् अविनाशी ब्रह्मा के रूप में होकर शाश्वत आनन्द का अनुभव करोगे। 22-23॥
Prince! After enjoying various types of pleasures, you will finally sacrifice your life in the battlefield for the protection of cows and Brahmins. Thereafter, in the form of a Brahmin, you will enjoy the happiness of heaven by performing yagyas with sufficient Dakshina. After that, you will experience eternal joy by being in the form of immortal Brahma. 22-23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥