Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.123.21-22h: तुमने कीड़े के रूप में जन्म लेकर भी मेरा दर्शन किया और यह उसी पुण्य का फल है कि तुम राजकुमार बन गए हो। और आज तुमने मेरी जो पूजा की है, उसी के फलस्वरूप इस क्षत्रिय योनि के बाद तुम ब्राह्मणत्व को प्राप्त करोगे। | mahabharat अध्याय 13.123: कीड़ेका क्रमश: क्षत्रिययोनिमें जन्म लेकर व्यासजीका दर्शन करना और व्यासजीका उसे ब्राह्मण होने तथा स्वर्गसुख और अक्षय सुखकी प्राप्ति होनेका वरदान देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुमने कीड़े के रूप में जन्म लेकर भी मेरा दर्शन किया और यह उसी पुण्य का फल है कि तुम राजकुमार बन गए हो। और आज तुमने मेरी जो पूजा की है, उसी के फलस्वरूप इस क्षत्रिय योनि के बाद तुम ब्राह्मणत्व को प्राप्त करोगे।
You saw me even after being born in the form of an insect and this is the result of that good deed that you have become a prince. And as a result of the worship you have done of me today, after this Kshatriya form, you will attain Brahminhood.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥