श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 123: कीड़ेका क्रमश: क्षत्रिययोनिमें जन्म लेकर व्यासजीका दर्शन करना और व्यासजीका उसे ब्राह्मण होने तथा स्वर्गसुख और अक्षय सुखकी प्राप्ति होनेका वरदान देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.123.2 
अहं त्वां दर्शनादेव तारयामि तपोबलात्।
तपोबलाद्धि बलवद् बलमन्यन्न विद्यते॥ २॥
 
 
अनुवाद
मैं अपनी आध्यात्मिक शक्ति से, केवल तुम्हें अपना दर्शन देकर, तुम्हारा उद्धार करूँगा; क्योंकि आध्यात्मिक शक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं है॥2॥
 
I shall rescue you by my spiritual power, just by giving you a glimpse of me; for there is no power greater than spiritual power.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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