श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 123: कीड़ेका क्रमश: क्षत्रिययोनिमें जन्म लेकर व्यासजीका दर्शन करना और व्यासजीका उसे ब्राह्मण होने तथा स्वर्गसुख और अक्षय सुखकी प्राप्ति होनेका वरदान देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.123.18 
नमस्तेऽस्तु महाप्राज्ञ किं करोमि प्रशाधि माम्।
त्वत्तपोबलनिर्दिष्टमिदं ह्यधिगतं मया॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! आपको मेरा नमस्कार है। कृपया मुझे आज्ञा दीजिए कि मैं आपकी क्या सेवा करूँ। आपकी तपस्या के फलस्वरूप ही मुझे राजा का पद प्राप्त हुआ है॥18॥
 
O great sage! My salutations to you. Please command me as to what service I may render to you. It is only due to your austerity that I have been given the position of king.॥ 18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas