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mahabharat 13.123.14: ऊँटों और खच्चरों से खींची जाने वाली गाड़ियाँ मुझे ढोती हैं। मैं अपने भाइयों और मंत्रियों के साथ मांस और चावल खाता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 13.123: कीड़ेका क्रमश: क्षत्रिययोनिमें जन्म लेकर व्यासजीका दर्शन करना और व्यासजीका उसे ब्राह्मण होने तथा स्वर्गसुख और अक्षय सुखकी प्राप्ति होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 123: कीड़ेका क्रमश: क्षत्रिययोनिमें जन्म लेकर व्यासजीका दर्शन करना और व्यासजीका उसे ब्राह्मण होने तथा स्वर्गसुख और अक्षय सुखकी प्राप्ति होनेका वरदान देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.123.14 
उष्ट्राश्वतरयुक्तानि यानानि च वहन्ति माम्।
सबान्धव: सहामात्यश्चाश्नामि पिशितौदनम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
ऊँटों और खच्चरों से खींची जाने वाली गाड़ियाँ मुझे ढोती हैं। मैं अपने भाइयों और मंत्रियों के साथ मांस और चावल खाता हूँ।
 
Carts drawn by camels and mules carry me. I eat meat and rice with my brothers and ministers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)