Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.123.12: कीट (क्षत्रिय) बोला—हे प्रभु! आज मैंने वह पद प्राप्त कर लिया है, जिसकी कोई तुलना नहीं है। मैं पिछले दस जन्मों से उसे प्राप्त करना चाहता था। आपकी कृपा है कि अपने दोषों के कारण कीट होते हुए भी मैं आज राजकुमार बन गया हूँ॥ 12॥ | mahabharat अध्याय 13.123: कीड़ेका क्रमश: क्षत्रिययोनिमें जन्म लेकर व्यासजीका दर्शन करना और व्यासजीका उसे ब्राह्मण होने तथा स्वर्गसुख और अक्षय सुखकी प्राप्ति होनेका वरदान देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कीट (क्षत्रिय) बोला—हे प्रभु! आज मैंने वह पद प्राप्त कर लिया है, जिसकी कोई तुलना नहीं है। मैं पिछले दस जन्मों से उसे प्राप्त करना चाहता था। आपकी कृपा है कि अपने दोषों के कारण कीट होते हुए भी मैं आज राजकुमार बन गया हूँ॥ 12॥
The insect (Kshatriya) said—O Lord! Today I have attained that position which has no comparison. I had been wanting to attain it for the last ten births. It is your grace that despite being an insect due to my faults, I have become a prince today.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥