व्यास उवाच
शुभेन कर्मणा यद्वै तिर्यग्योनौ न मुह्यसे।
ममैव कीट तत् कर्म येन त्वं न प्रमुह्यसे॥ १॥
अनुवाद
व्यासजी बोले, "कीट! जिन शुभ कर्मों के कारण तू पशुलोक में जन्म लेकर भी मोहित नहीं हुआ है, वे मेरे ही कर्म हैं। मेरी दृष्टि के प्रभाव से तू मोहित नहीं हुआ है॥1॥
Vyasa said, "Insect! The good deeds due to which you have not been deluded even after being born in the animal world are my deeds. You are not deluded due to the influence of my sight. ॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥