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mahabharat 13.122.6: हे पुरुषोत्तम! युधिष्ठिर! इस विषय में मैं आपसे द्वैपायन व्यास और एक कीड़े के बीच हुए संवाद की प्रसिद्ध प्राचीन कथा कह रहा हूँ ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 13.122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.122.6 
अत्र ते वर्तयिष्यामि पुरावृत्तमिदं नृप।
द्वैपायनस्य संवादं कीटस्य च युधिष्ठिर॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! युधिष्ठिर! इस विषय में मैं आपसे द्वैपायन व्यास और एक कीड़े के बीच हुए संवाद की प्रसिद्ध प्राचीन कथा कह रहा हूँ ॥6॥
 
O lord of men! Yudhishthira! In this matter I am telling you the famous ancient story of the conversation between Dwaipayana Vyasa and an insect. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)