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mahabharat 13.122.2: हे मुनिवर! आप जानते हैं कि महायुद्ध में प्राण त्यागना मनुष्यों के लिए कितना कष्टकर होता है। प्राण त्यागना अत्यन्त कठिन कार्य है। 2॥   |   mahabharat अध्याय 13.122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.122.2 
दु:खं प्राणपरित्याग: पुरुषाणां महामृधे।
जानासि त्वं महाप्राज्ञ प्राणत्यागं सुदुष्करम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे मुनिवर! आप जानते हैं कि महायुद्ध में प्राण त्यागना मनुष्यों के लिए कितना कष्टकर होता है। प्राण त्यागना अत्यन्त कठिन कार्य है। 2॥
 
Great sage! You know how painful it is for humans to sacrifice their lives in a great battle. Sacrificing one's life is a very difficult task. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)