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mahabharat 13.122.15: भीष्म कहते हैं - राजन! जब कीड़े ने ऐसा कहा, तब व्यास ने उससे पूछा - 'कीट! तुम्हारा सुख कहाँ है?' मेरी राय में, तुम्हारा मरना ही तुम्हारे लिए सुख का विषय होगा; क्योंकि तुम तिर्यक योनि में हो - नीच कीट-योनि में।   |   mahabharat अध्याय 13.122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.122.15 
भीष्म उवाच
इत्युक्त: स तु तं प्राह कुत: कीट सुखं तव।
मरणं ते सुखं मन्ये तिर्यग्योनौ तु वर्तसे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! जब कीड़े ने ऐसा कहा, तब व्यास ने उससे पूछा - 'कीट! तुम्हारा सुख कहाँ है?' मेरी राय में, तुम्हारा मरना ही तुम्हारे लिए सुख का विषय होगा; क्योंकि तुम तिर्यक योनि में हो - नीच कीट-योनि में।
 
Bhishma says - King! When the insect said this, Vyasa asked it - 'Insect! Where is your happiness?' In my opinion, your death itself will be a matter of happiness for you; because you are in the Tiryak Yoni - the lowly insect-yoni.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)