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mahabharat 13.122.1: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! इस महायुद्ध में जो योद्धा स्वेच्छा से या अनिच्छा से मारे गए, उनका क्या हश्र हुआ? कृपया मुझे यह बताइए।   |   mahabharat अध्याय 13.122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.122.1 
युधिष्ठिर उवाच
अकामाश्च सकामाश्च ये हता: स्म महामृधे।
कां गतिं प्रतिपन्नास्ते तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! इस महायुद्ध में जो योद्धा स्वेच्छा से या अनिच्छा से मारे गए, उनका क्या हश्र हुआ? कृपया मुझे यह बताइए।
 
Yudhishthira asked - Grandfather! What fate did those warriors who were killed willingly or unwillingly in this great war attain? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)