श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 121: मांस न खानेसे लाभ और अहिंसाधर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.121.30 
सर्वयज्ञेषु वा दानं सर्वतीर्थेषु वाऽऽप्लुतम्।
सर्वदानफलं वापि नैतत्तुल्यमहिंसया॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
समस्त यज्ञों में किया गया दान, समस्त तीर्थों में लिया गया स्नान और समस्त दानों का फल - ये सब मिलकर भी अहिंसा के समान नहीं हो सकते ॥30॥
 
The donations made in all the yagyas, the dip taken in all the holy places and the fruits of all the donations - even all these put together cannot equal non-violence. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)