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mahabharat 13.121.10: हे कौरवपुत्र! इस लोक में या परलोक में इसके समान दूसरा कोई पुण्य कर्म नहीं है कि इस लोक में समस्त प्राणियों पर दया की जाए॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 13.121: मांस न खानेसे लाभ और अहिंसाधर्मकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 121: मांस न खानेसे लाभ और अहिंसाधर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.121.10 
न ह्यत: सदृशं किंचिदिह लोके परत्र च।
यत् सर्वेष्विह भूतेषु दया कौरवनन्दन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे कौरवपुत्र! इस लोक में या परलोक में इसके समान दूसरा कोई पुण्य कर्म नहीं है कि इस लोक में समस्त प्राणियों पर दया की जाए॥ 10॥
 
O son of Kaurava! There is no other pious act like this in this world or the next, that one should show mercy to all creatures in this world.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)