श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 121: मांस न खानेसे लाभ और अहिंसाधर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.121.1 
युधिष्ठिर उवाच
इमे वै मानवा लोके नृशंसा मांसगृद्धिन:।
विसृज्य विविधान् भक्ष्यान् महारक्षोगणा इव॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - 'पितामह! यह बड़े दुःख की बात है कि संसार के ये निर्दयी लोग उत्तम भोजन का त्याग करके महान राक्षसों की भाँति मांस का स्वाद लेना चाहते हैं॥1॥
 
Yudhishthira said, 'Grandfather! It is very sad that these ruthless people of the world, abandoning good food items, want to taste meat like great demons.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)