श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  13.120.76 
एतत्ते कथितं राजन् मांसस्य परिवर्जने।
प्रवृत्तौ च निवृत्तौ च विधानमृषिनिर्मितम्॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैंने तुम्हें मांसाहार से दूर रहने का नियम तथा ऋषियों द्वारा प्रतिपादित सांसारिक कर्मों से संबंधित धर्म बताया है।
 
O King, I have told you about the rule of abstaining from meat as well as the Dharma related to worldly activities, formulated by the sages.
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि मांसभक्षणनिषेधे पञ्चदशाधिक शततमोऽध्याय:॥ ११५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें मांसभक्षणका निषेधविषयक एक सौ पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)