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mahabharat 13.120.71: जो मनुष्य मांसाहार त्यागने का धर्म अपनाता है अथवा दूसरों को बताता है, वह चाहे कितना ही दुष्ट क्यों न हो, नरक में नहीं जाता। 71.   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.120.71 
इमं धर्मममांसादं यश्चरेच्छ्रावयीत वा।
अपि चेत् सुदुराचारो न जातु निरयं व्रजेत्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य मांसाहार त्यागने का धर्म अपनाता है अथवा दूसरों को बताता है, वह चाहे कितना ही दुष्ट क्यों न हो, नरक में नहीं जाता। 71.
 
One who practices this religion of abandoning meat-eating or tells it to others, no matter how wicked he may be, does not go to hell. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)