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mahabharat 13.120.70: जो पुण्यात्मा पुरुष जन्म से ही इस संसार में मधु, मदिरा और मांस का सदा के लिए त्याग कर देते हैं, वे सब ऋषि माने जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.120.70 
मधु मांसं च ये नित्यं वर्जयन्तीह धार्मिका:।
जन्मप्रभृति मद्यं च सर्वे ते मुनय: स्मृता:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
जो पुण्यात्मा पुरुष जन्म से ही इस संसार में मधु, मदिरा और मांस का सदा के लिए त्याग कर देते हैं, वे सब ऋषि माने जाते हैं।
 
The virtuous men who from their very birth give up honey, wine and meat forever in this world are all considered as sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)