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mahabharat 13.120.7: हे कुरुपुत्र युधिष्ठिर! इस विषय पर ऋषियों में अनेक बार चर्चा हो चुकी है। अन्त में, उनके मतानुसार जो सिद्धान्त निश्चित किया गया है, उसे मैं तुम्हें बता रहा हूँ। सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.120.7 
ऋषीणामत्र संवादो बहुश: कुरुनन्दन।
बभूव तेषां तु मतं यत् तच्छृणु युधिष्ठिर॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र युधिष्ठिर! इस विषय पर ऋषियों में अनेक बार चर्चा हो चुकी है। अन्त में, उनके मतानुसार जो सिद्धान्त निश्चित किया गया है, उसे मैं तुम्हें बता रहा हूँ। सुनो।
 
Yudhishthira, son of Kuruṇā! This subject has been discussed many times among the sages. Finally, I am telling you the principle that has been decided based on their opinions. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)