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mahabharat 13.120.55: जो मनुष्य वर्षा के चार महीनों में मांस का त्याग करता है, उसे चार शुभ वस्तुएं प्राप्त होती हैं - यश, आयु, तेज और बल ॥ 55॥   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  13.120.55 
चतुरो वार्षिकान् मासान् यो मांसं परिवर्जयेत्।
चत्वारि भद्राण्यवाप्नोति कीर्तिमायुर्यशोबलम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य वर्षा के चार महीनों में मांस का त्याग करता है, उसे चार शुभ वस्तुएं प्राप्त होती हैं - यश, आयु, तेज और बल ॥ 55॥
 
He who gives up meat during the four rainy months attains the four auspicious things - fame, long life, glory and strength. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)