श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.120.52 
इदं तु शृणु राजेन्द्र कीर्त्यमानं मयानघ।
अभक्षणे सर्वसुखं मांसस्य मनुजाधिप॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजा! हे समस्त मनुष्यों के स्वामी! मेरी कही हुई बात सुनो - मांस न खाने से मनुष्य को सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं ॥ 52॥
 
O sinless king! O lord of all human beings! Listen to what I have said - by not eating meat one attains all kinds of happiness. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)