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mahabharat 13.120.51: उस समय देवराज वसु गलत निर्णय देने के कारण आकाश से पृथ्वी पर गिर पड़े और तत्पश्चात् पुनः पृथ्वी पर वैसा ही निर्णय देने के कारण पाताल लोक में चले गए ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  13.120.51 
आकाशादवनिं प्राप्तस्तत: स पृथिवीपति:।
एतदेव पुनश्चोक्त्वा विवेश धरणीतलम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
उस समय देवराज वसु गलत निर्णय देने के कारण आकाश से पृथ्वी पर गिर पड़े और तत्पश्चात् पुनः पृथ्वी पर वैसा ही निर्णय देने के कारण पाताल लोक में चले गए ॥ 51॥
 
At that time, the celestial King Vasu fell from the sky to the earth due to giving a wrong decision. Thereafter, due to giving the same decision on earth again, he ended up in the netherworld. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)