श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  13.120.42 
खादकस्य कृते जन्तून् यो हन्यात् पुरुषाधम:।
महादोषतरस्तत्र घातको न तु खादक:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जो मांसाहारियों के लिए पशुवध करता है, वह अधम मनुष्य है। मारने वाले को घोर पाप लगता है। मांसाहारी उतना पापी नहीं है, जितना वह है।॥42॥
 
‘He who kills animals for meat eaters is the lowest of men. The killer incurs a very grave sin. The meat eater is not as guilty as he is.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)