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mahabharat 13.120.4: मनुष्य किस प्रकार दीर्घायु होता है, किस प्रकार बलवान होता है, किस प्रकार सिद्धि प्राप्त करता है और किस प्रकार शुभ लक्षणों से युक्त होता है? ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.120.4 
कथमायुरवाप्नोति कथं भवति सत्त्ववान्।
कथमव्यंगतामेति लक्षण्यो जायते कथम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य किस प्रकार दीर्घायु होता है, किस प्रकार बलवान होता है, किस प्रकार सिद्धि प्राप्त करता है और किस प्रकार शुभ लक्षणों से युक्त होता है? ॥4॥
 
How does a man attain longevity, how does he become strong, how does he attain perfection and how is he blessed with auspicious signs? ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)