श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.120.35 
धन्यं यशस्यमायुष्यं स्वर्ग्यं स्वस्त्ययनं महत्।
मांसस्याभक्षणं प्राहुर्नियता: परमर्षय:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
नियमबद्ध महर्षियों ने कहा है कि मांसाहार का त्याग ही धन, यश, आयु और स्वर्ग प्राप्ति का प्रधान साधन तथा परम कल्याण का साधन है ॥ 35॥
 
The great sages who are bound by rules have said that giving up meat-eating is the chief means of attaining wealth, fame, long life and heaven, and the means of ultimate welfare. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)