Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.120.31: हे पराक्रमी राजन! हिंसकों के पाप हिंसकों के प्राणों को ही खा जाते हैं। अतः जो मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, उसे मांस का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए। 31. | mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे पराक्रमी राजन! हिंसकों के पाप हिंसकों के प्राणों को ही खा जाते हैं। अतः जो मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, उसे मांस का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए। 31.
O mighty king! The sins of the violent ones consume the life of the violent ones. Therefore, a person who wants his own welfare should completely abandon meat. 31.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥