श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.120.3 
एतदिच्छामि तत्त्वेन कथ्यमानं त्वयानघ।
निश्चयेन चिकीर्षामि धर्ममेतं सनातनम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप पितामह! मैं चाहता हूँ कि आप इस विषय पर यथार्थ रूप से विचार करें। मैं इस सनातन धर्म का पालन अवश्य करना चाहता हूँ। ॥3॥
 
Sinless Grandfather! I want you to discuss this matter in a realistic manner. I definitely wish to follow this eternal religion. ॥3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)