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mahabharat 13.120.24: मांस घास, लकड़ी या पत्थर से उत्पन्न नहीं होता; वह तो किसी जीव को मारकर ही मिलता है; इसलिए उसे खाने में बड़ा दोष है ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.120.24 
न हि मांसं तृणात् काष्ठादुपलाद्वापि जायते।
हत्वा जन्तुं ततो मांसं तस्माद् दोषस्तु भक्षणे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मांस घास, लकड़ी या पत्थर से उत्पन्न नहीं होता; वह तो किसी जीव को मारकर ही मिलता है; इसलिए उसे खाने में बड़ा दोष है ॥24॥
 
Meat cannot be produced from grass, wood or stone; it is available only after killing a living being; hence there is a great flaw in eating it. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)