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mahabharat 13.120.23: अहिंसा परम धर्म है, अहिंसा परम तप है और अहिंसा परम सत्य है; क्योंकि इसी से धर्म की प्रवृत्ति प्रारम्भ होती है। 23.   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.120.23 
अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परं तप:।
अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्म: प्रवर्तते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अहिंसा परम धर्म है, अहिंसा परम तप है और अहिंसा परम सत्य है; क्योंकि इसी से धर्म की प्रवृत्ति प्रारम्भ होती है। 23.
 
Non-violence is the ultimate religion, non-violence is the ultimate penance and non-violence is the ultimate truth; because it is from this that the tendency of religion starts. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)