Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.120.20-21: अतः जो बुद्धिमान और धर्मात्मा हैं, उन्हें सभी प्राणियों को समान समझना चाहिए। जब ​​अपना कल्याण चाहने वाले विद्वान् लोग भी मृत्यु से डरते हैं, तो फिर मांसाहार पर निर्भर रहने वाले पापी मनुष्यों द्वारा बलपूर्वक मारे जाने वाले स्वस्थ और निर्दोष प्राणी, जो जीवित रहना चाहते हैं, क्यों न डरें?   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  13.120.20-21 
आत्मौपम्येन मन्तव्यं बुद्धिमद्भि: कृतात्मभि:।
मृत्युतो भयमस्तीति विदुषां भूतिमिच्छताम्॥ २०॥
किं पुनर्हन्यमानानां तरसा जीवितार्थिनाम्।
अरोगाणामपापानां पापैर्मांसोपजीविभि:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अतः जो बुद्धिमान और धर्मात्मा हैं, उन्हें सभी प्राणियों को समान समझना चाहिए। जब ​​अपना कल्याण चाहने वाले विद्वान् लोग भी मृत्यु से डरते हैं, तो फिर मांसाहार पर निर्भर रहने वाले पापी मनुष्यों द्वारा बलपूर्वक मारे जाने वाले स्वस्थ और निर्दोष प्राणी, जो जीवित रहना चाहते हैं, क्यों न डरें?
 
Therefore, those who are wise and pious should consider all beings as their equals. When even learned people who wish for their own welfare are afraid of death, then why should not healthy and innocent beings who wish to live and are killed forcefully by sinful men who make their living on meat, be afraid?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)