Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.120.2: जो मनुष्य किसी पशु को मारकर उसका मांस खाता है, अथवा जो किसी दूसरे का दिया हुआ मांस खाता है, अथवा जो किसी दूसरे के खाने के लिए पशु को मारता है, अथवा जो मांस खरीदकर खाता है, उसे क्या दण्ड मिलता है? ॥2॥ | mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हत्वा भक्षयतो वापि परेणोपहृतस्य वा।
हन्याद् वा य: परस्यार्थे क्रीत्वा वा भक्षयेन्नर:॥ २॥
अनुवाद
जो मनुष्य किसी पशु को मारकर उसका मांस खाता है, अथवा जो किसी दूसरे का दिया हुआ मांस खाता है, अथवा जो किसी दूसरे के खाने के लिए पशु को मारता है, अथवा जो मांस खरीदकर खाता है, उसे क्या दण्ड मिलता है? ॥2॥
What punishment does a person get who slaughters an animal and eats its meat, or who eats meat given by someone else, or who slaughters an animal for someone else to eat, or who buys meat and eats it? ॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥