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mahabharat 13.120.18: जो विद्वान् मनुष्य समस्त प्राणियों को अभय प्रदान करता है, वह निस्संदेह इस संसार में जीवनदाता माना जाता है ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.120.18 
सर्वभूतेषु यो विद्वान् ददात्यभयदक्षिणाम्।
दाता भवति लोके स प्राणानां नात्र संशय:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जो विद्वान् मनुष्य समस्त प्राणियों को अभय प्रदान करता है, वह निस्संदेह इस संसार में जीवनदाता माना जाता है ॥18॥
 
The learned person who grants protection to all living beings is undoubtedly considered the life-giver in this world. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)