Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.120.11: जो मनुष्य मांस का त्याग कर देता है, कोई भी प्राणी उसका तिरस्कार नहीं करता, वह सब प्राणियों का विश्वासपात्र हो जाता है और श्रेष्ठ पुरुष सदैव उसका आदर करते हैं ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.120.11 
अधृष्य: सर्वभूतानां विश्वास्य: सर्वजन्तुषु।
साधूनां सम्मतो नित्यं भवेन्मांसं विवर्जयन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य मांस का त्याग कर देता है, कोई भी प्राणी उसका तिरस्कार नहीं करता, वह सब प्राणियों का विश्वासपात्र हो जाता है और श्रेष्ठ पुरुष सदैव उसका आदर करते हैं ॥11॥
 
The man who abandons meat, no creature despises him, he becomes the trustworthy of all creatures and the noble men always respect him. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)