भीष्म उवाच
कृतघ्नानां गतिस्तात नरके शाश्वती: समा:।
मातापितृगुरूणां च ये न तिष्ठन्ति शासने॥
कृमिकीटपिपीलेषु जायन्ते स्थावरेषु च।
दुर्लभो हि पुनस्तेषां मानुष्ये पुनरुद्भव:॥
अनुवाद
भीष्म बोले, "महाराज! कृतघ्न लोगों की एक ही नियति है, उन्हें सदैव नरक में रहना पड़ता है। जो लोग अपने माता-पिता और बड़ों की आज्ञा नहीं मानते, वे कीड़े-मकोड़ों, चींटियों और वृक्षों आदि की योनियों में जन्म लेते हैं। उनके लिए पुनः मनुष्य योनि में जन्म लेना कठिन हो जाता है।"
Bhishma said, "Sir! There is only one fate for ungrateful people, they have to remain in hell forever. Those who do not obey their parents and elders are born in the yoni of worms, insects, ants and trees etc. It becomes difficult for them to be born again in the human yoni.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)