श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक d24
 
 
श्लोक  13.12.d24 
धर्म उवाच
वत्सनाभ महाप्राज्ञ बहुवर्षशतायुष:।
परितुष्टोऽस्मि त्यागेन नि:सङ्गेन तथाऽऽत्मन:॥
 
 
अनुवाद
धर्म ने कहा - महाप्रज्ञ वत्सनाभ! आपकी आयु कई सौ वर्ष की है। मैं आसक्ति रहित आत्म-त्याग के आपके विचार से अत्यंत संतुष्ट हूँ।
 
Dharma said – Mahapragya Vatsanabha! Your age is several hundred years. I am very satisfied with your idea of ​​self-sacrifice without attachment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)