श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  13.12.d16 
अचिन्तयद् विस्मितश्च वर्षात् केनाभिरक्षित:।
ततोऽपश्यत् तं महिषमवस्थितमदूरत:॥
 
 
अनुवाद
तभी वह आश्चर्यचकित होकर सोचने लगा, ‘इस बारिश से मेरी रक्षा किसने की है?’ तभी उसकी नजर पास में खड़ी भैंस पर पड़ी।
 
Then he was astonished and started thinking, 'Who has protected me from this rain?' Just then his eyes fell on the buffalo standing nearby.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)