श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  13.12.d1 
(युधिष्ठिर उवाच
प्रायश्चित्तं कृतघ्नानां प्रतिब्रूहि पितामह।
मातापितॄन् गुरूंश्चैव येऽवमन्यन्ति मोहिता:॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! जो कृतघ्न मनुष्य मोहवश अपने माता-पिता और बड़ों का अपमान करते हैं, उनके लिए क्या प्रायश्चित है? कृपया मुझे बताइए।
 
Yudhishthira asked - Grandfather! What is the atonement for those ungrateful people who insult their parents and elders out of attachment? Please tell me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)