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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान
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श्लोक 9
श्लोक
13.12.9
सरोऽपश्यत् सुरुचिरं पूर्णं परमवारिणा।
सोऽवगाह्य सरस्तात पाययामास वाजिनम्॥ ९॥
अनुवाद
घूमते-घूमते उसे एक सुंदर, निर्मल जल से भरी झील दिखाई दी। उसने घोड़े को झील में नहलाया और पानी पिलाया।
While roaming around, he saw a beautiful lake filled with pure water. He bathed the horse in the lake and gave it water to drink.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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