श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.12.49 
वरं च वृणु राजेन्द्र यं त्वमिच्छसि सुव्रत।
पुरुषत्वमथ स्त्रीत्वं मत्तो यदभिकाङ्क्षते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले राजन, आप मुझसे अपनी इच्छानुसार कोई भी वर मांग सकते हैं। बताइए, क्या आप पुनः पुरुष बनना चाहते हैं या स्त्री ही रहना चाहते हैं? आप मुझसे जो चाहें ले लीजिए।॥49॥
 
O king, who observes the best vows, you may ask me for any other boon of your choice. Tell me, do you want to become a man again or do you wish to remain a woman? Take whatever you want from me.'॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)