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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान
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श्लोक 48
श्लोक
13.12.48
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्ततस्त्विन्द्र: प्रीतो वाक्यमुवाच ह।
सर्व एवेह जीवन्तु पुत्रास्ते सत्यवादिनि॥ ४८॥
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! तपसी के ऐसा कहने पर इन्द्र बहुत प्रसन्न हुए और इस प्रकार बोले - 'सत्यवादिनी ! आपके सभी पुत्र जीवित रहें ॥48॥
Bhishmaji says – King! Indra was very happy after Tapasi said this and said thus - 'Satyavadini! May all your sons live. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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