प्रणिपातेन तस्येन्द्र: परितुष्टो वरं ददौ॥ ४२॥
पुत्रास्ते कतमे राजन् जीवन्त्वेतत् प्रचक्ष्व मे।
स्त्रीभूतस्य हि ये जाता: पुरुषस्याथ येऽभवन्॥ ४३॥
अनुवाद
उनके इस प्रकार नमस्कार करने पर इन्द्र प्रसन्न हुए और वर देने को तत्पर होकर बोले - हे राजन! आपके पुत्रों में से कौन जीवित रहेगा? वे जिन्हें आपने स्त्री होकर जन्म दिया था अथवा वे जो आपके पुरुष होने पर उत्पन्न हुए थे?॥42-43॥
‘After being thus saluted by them, Indra became pleased and being ready to grant a boon said, O King! Which of your sons will be alive? Those whom you gave birth to as a woman or those who were born to you when you were a man?’॥ 42-43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)